मानवाधिकार संगठन ‘जन हस्तक्षेप’, ‘पीयूसीएल-दिल्ली’ और ‘सिटिज़न्स फॉर डेमोक्रेसी’ (सीएफडी) ने करोड़ों वोटरों को मतदाता सूचियों से बाहर किए जाने के खिलाफ तथा जनविरोधी एसआईआर को रद्द करने और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों, युवाओं, महिलाओं, श्रमिकों और किसानों, राजनीतिक, सामाजिक और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं तथा आम नागरिकों को दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा बर्बरतापूर्वक गिरफ्तार कर बेहद अमानवीय परिस्थितियों में हिरासत में रखे जाने की निंदा की है।
इन संगठनों की तरफ़ से शनिवार को जारी एक साझा बयान में कहा गया है कि एक ओर सरकार ने उनके विरोध प्रकट करने के मूल अधिकार और जंतर-मंतर जैसी ऐतिहासिक जगह पर प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी है, तो दूसरी तरफ जनता अपना विरोध प्रकट करने के लिए जहाँ भी एकत्र होती है, वहाँ सुरक्षा बल क्रूरतापूर्वक उन्हें गिरफ्तार करते हैं। इसके बाद उन्हें न्यूनतम सुविधाएँ दिए बिना देर रात दिल्ली की सीमाओं से दूर छोड़ दिया जाता है।
बयान के अनुसार पीपुल अगेंस्ट एसआईआर द्वारा आयोजित विरोध मार्च में 23 अक्टूबर को दिल्ली में गुरुद्वारा बंगला साहिब से हजारों प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग तक मार्च निकाला, जिसे पुलिस और आरएएफ ने रास्ते में ही रोक दिया। छात्रों और महिलाओं तथा ट्रेड यूनियन और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर काफी देर तक सड़कों पर घुमाने के बाद द्वारका सेक्टर-23 के थाने में बंद कर दिया गया। उन्हें पीने का पानी तक नहीं दिया गया।
बयान में कहा गया है कि दिल्ली समेत देश भर में शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को कई सप्ताह से पुलिस रोजाना हिरासत में लेती है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन प्रदर्शनकारियों के साथ आंदोलन के दौरान और हिरासत में मारपीट की घटनाएँ भी सामने आई हैं। अनेक ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के साथ अभद्रता की और उनके कपड़े तक फाड़ दिए। उनके लिए भोजन तो दूर की बात, पानी और शौचालय तक का कोई इंतजाम नहीं किया जाता। इसकी मांग करने पर उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की जाती है। कम उम्र की लड़कियों को घर लौटते समय उनकी सुरक्षा के बारे में सोचे बिना आधी रात को दूर-दराज के सुनसान इलाकों में हिरासत से रिहा कर दिया जाता है।
बयान के अनुसार लोकतांत्रिक और मानवाधिकार संगठन पिछले कई सप्ताह से जारी मानवाधिकारों के उल्लंघनों की ओर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं और उससे इन मामलों का संज्ञान लेने की गुहार लगा रहे हैं। तीनों संगठनों ने इस संबंध में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को अलग से भी एक प्रपत्र प्रेषित करने का फैसला किया है।
अनिल दूबे (जनहस्तक्षेप), टीएस आहूजा (पीयूसीएल) और ज्योत्सना राय (सीएफडी) के जारी बयान में कहा गया है कि संगठन दिल्ली पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों की इन असंवैधानिक, गैरकानूनी, अनैतिक और अमानवीय कार्रवाइयों का पुरजोर विरोध करते हैं। वे सरकार से इस तरह की कार्रवाइयों के दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हैं। साथ ही, रात में हिरासत से रिहा किए जाने वाले आंदोलनकारियों, खास तौर से महिला प्रदर्शनकारियों, की सुरक्षित घर वापसी की जिम्मेदारी पुलिस पर आयद किए जाने की मांग करते हैं।
जन हस्तक्षेप, पीयूसीएल-दिल्ली और सीएफडी राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग से भी अनुरोध करते हैं कि वह तुरंत पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों के मानव अधिकार के गंभीर उल्लंघन का संज्ञान ले और उचित कार्रवाई करे।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)